उर्दू शायरी · ग़ज़ल

koi baiTha raha shabab samet

कोई बैठा रहा शबाब समेत

کوئی بیٹھا رہا شباب سمیت

शायर: Ikram Arfi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कोई बैठा रहा शबाब समेत
और मैं सो गया किताब समेत

ये कहा था तिरा जवाब नहीं
फिर कोई आ गया जवाब समेत

मैं तिरे ख़ाली हाथ के क़ुर्बान
मुझ से मिलना मगर गुलाब समेत

मिलने आया है कोई जान-ए-ग़ज़ल
'मीर' साहिब के इंतिख़ाब समेत

नींद आती है करवटें ले कर
रंज के साथ इज़्तिराब समेत

डूब जाने में कोई हर्ज नहीं
डूबना हो अगर शराब समेत