उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye masala bhi hoga kabhi hal kisi tarah

ये मसअला भी होगा कभी हल किसी तरह

یہ مسئلہ بھی ہوگا کبھی حل کسی طرح

शायर: Tahir Saood Kiratpuri9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

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ये मसअला भी होगा कभी हल किसी तरह
या'नी जुनून-ए-'इश्क़ मुकम्मल किसी तरह

शब की सियाहियों को उजाला बनाऊँगा
मिल जाए उस की आँख का काजल किसी तरह

कछवे ने आसमान को सर पर उठा लिया
इक-आध बार आ गया अव्वल किसी तरह

शाख़-ए-'उलूम इस पे ब-ज़िद है ब-सद-शु'ऊर
ज़ंजीर-ए-पा बनाउँगी पायल किसी तरह

सूखे हुए दरख़्त की आँखों में दर्ज था
हो जाए सब्ज़ जिस्म का जंगल किसी तरह

ये कौन लोग हैं अरे ये कौन लोग हैं
चुप-चाप बैठते नहीं पागल किसी तरह

कब तक चलेगा दूसरे लोगों के पाँव पर
ख़ुद अपने पाँव पर भी कभी चल किसी तरह

रक्खूँगा मैं वो क़ीमती ज़मज़म सँभाल कर
बरसा जो उस की आँख से बादल किसी तरह

वो शख़्स कुल-जहान पे छा जाएगा 'स'ऊद'
छुट जाए उस के हाथ से बोतल किसी तरह