उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye marhale bhi mohabbat ke bab mein aae

ये मरहले भी मोहब्बत के बाब में आए

یہ مرحلے بھی محبت کے باب میں آئے

शायर: Raees Warsi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये मरहले भी मोहब्बत के बाब में आए
बिछड़ गए थे जो हम से वो ख़्वाब में आए

वो जिस की राह में हम ने बिछाए ग़ुंचा-ओ-गुल
उसी मकान से पत्थर जवाब में आए

न जिस को दस्त-ए-हिनाई का तेरे लम्स मिले
कहाँ से बू-ए-वफ़ा उस गुलाब में आए

तुम्हारे हुस्न-ए-नज़र से हैं मो'तबर हम भी
जो हम किसी निगह-ए-इंतिख़ाब में आए

अगरचे मिस्ल है आब-ए-रवाँ के रेग-ए-सराब
कहाँ से शोरिश-ए-दरिया सराब में आए

तिरे ख़याल का पैकर सजा है सीने में
हम इस तरह तिरी चश्म-ए-ख़ुश-आब में आए

हवा के दोश पे उस ने लिखा है नाम-ए-'रईस'
ये सुन के लोग बहुत पेच-ओ-ताब में आए