उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jubba kisi ka aur na dastar dekhna

जुब्बा किसी का और न दस्तार देखना

جبہ کسی کا اور نہ دستار دیکھنا

शायर: Raees Warsi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जुब्बा किसी का और न दस्तार देखना
है कौन मुफ़लिसों का तरफ़-दार देखना

तर्ज़-ए-सुख़न न शोख़ी-ए-गुफ़्तार देखना
इंसानियत का कौन है ग़म-ख़्वार देखना

ये अरसा-ए-हयात भी सूरज की ज़द पे है
लम्हों के बा'द साया-ए-दीवार देखना

हर ज़ाद ये हयात का मेरी नज़र में है
मेरा सफ़र है सूरत-ए-परकार देखना

दीवार-ओ-दर पे कैसी मुसल्लत है ख़ामुशी
नैरंगी-ए-ज़रीया-ए-इज़हार देखना

जो दर्स दे रहे हैं फ़रोग़-ए-किताब का
कितने वही हैं इल्म से बेज़ार देखना

मंशूर जिस का उस्वा-ए-शब्बीर हो 'रईस'
ऐसा है कौन साहब-ए-किरदार देखना