उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jo dekho to wo chehra ajnabi hai

जो देखो तो वो चेहरा अजनबी है

جو دیکھو تو وہ چہرہ اجنبی ہے

शायर: Raees Warsi9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जो देखो तो वो चेहरा अजनबी है
अगर सोचो तो वज्ह-ए-ज़िंदगी है

मुझे है ए'तिराफ़-ए-जुर्म-ए-उल्फ़त
मुझे तुम से मोहब्बत हो गई है

मिरी आँखें लुटाती हैं जो गौहर
मिज़ाज-ए-इश्क़ में दरिया-दिली है

मसीहाई न तुम से हो सकेगी
हमारा दर्द-ए-उल्फ़त दाइमी है

तिरा पैकर ख़यालों में बसा है
हर इक सू रौशनी ही रौशनी है

हमें रास आ गई ख़ूबाँ-परस्ती
बड़ी दिलकश हमारी ज़िंदगी है

तिरी चाहत का है ये भी करिश्मा
अदू से भी हमारी दोस्ती है

मुझे मय-कश समझता है ज़माना
निगाहों में ख़ुमार-ए-आशिक़ी है

मज़ा जब है वो कह दे बे-ख़ुदी में
क़रार-ए-जाँ 'रईस'-ए-वारसी है