उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aawara bu-e-gul ki tarah hain chaman se dur

आवारा बू-ए-गुल की तरह हैं चमन से दूर

آوارہ بوئے گل کی طرح ہیں چمن سے دور

शायर: Raees Warsi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आवारा बू-ए-गुल की तरह हैं चमन से दूर
लग़ज़ीदा-पा नहीं हैं मगर हम वतन से दूर

तारीक रास्तों में बिछाते हैं रौशनी
ऐसे भी कुछ चराग़ जले अंजुमन से दूर

जिस ने नसीम-ए-सुब्ह को बख़्शी है ताज़गी
ख़ुशबू वो किस क़दर है परेशाँ चमन से दूर

वो लोग जिन का ख़ून है रंग-ए-बहार में
रक्खा गया है उन को ही सेहन-ए-चमन से दूर

संग-ए-असास होने के एहसास ने हमें
अब तक रखा है लज़्ज़त-ए-तश्हीर-ए-फ़न से दूर

अब उस को क्या कहें वही फ़नकार-ए-वक़्त है
जो शख़्स अस्र-ए-नौ में है मेयार-ए-फ़न से दूर