उर्दू शायरी · ग़ज़ल

KHud-agahi ka ajab rog lag gaya hai mujhe

ख़ुद-आगही का अजब रोग लग गया है मुझे

خود آگہی کا عجب روگ لگ گیا ہے مجھے

शायर: Raees Warsi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ख़ुद-आगही का अजब रोग लग गया है मुझे
कि अपनी ज़ात पे धोका तिरा हुआ है मुझे

पुकारती है हवाओं की नग़्मगी तुझ को
सुकूत झील का आवाज़ दे रहा है मुझे

अजीब ज़ौक़-ए-मोहब्बत अता किया तू ने
वजूद-ए-संग भी तहज़ीब-ए-आईना है मुझे

मैं अपने नाम से ना-आश्ना सही लेकिन
तुम्हारे नाम से हर शख़्स जानता है मुझे

मैं अपने घर के दिए भी भुलाए बैठा हूँ
तिरे ख़याल ने ये हौसला दिया है मुझे

कहाँ ये फ़ुर्सत-ए-काविश कि तुझ को याद करूँ
शुऊर-ए-ज़ात का दरपेश मरहला है मुझे

'रईस' शेर की दुनिया से क्या ग़रज़ मुझ को
किसी की याद ने शाइ'र बना दिया है मुझे