उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ab to jo manzar-e-shadab nazar aata hai

अब तो जो मंज़र-ए-शादाब नज़र आता है

اب تو جو منظر شاداب نظر آتا ہے

शायर: Raees Warsi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अब तो जो मंज़र-ए-शादाब नज़र आता है
ऐसा लगता है कोई ख़्वाब नज़र आता है

इस हसीं शहर में हर सम्त है लोगों का हुजूम
और इंसाँ है कि नायाब नज़र आता है

कब तलक जिंस-ए-वफ़ा शहर में अर्ज़ां होगी
अब ये दरिया भी तो पायाब नज़र आता है

गर्दिश-ए-वक़्त ने ऐसे भी तराशे हैं सराब
दश्त-ए-बे-आब में गिर्दाब नज़र आता है

होने लगता है तिरे क़ुर्ब का एहसास मुझे
चौदहवीं शब को जो महताब नज़र आता है

तेरी अंगुश्त-ए-हिनाई का जिसे लम्स मिले
वो नगीना बड़ा ख़ुश-आब नज़र आता है

उस की ख़ुशबू से मोअ'त्तर मिरा आँगन है 'रईस'
जागती आँख से ये ख़्वाब नज़र आता है