उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye mana tum ho zamane ke ba-kamalon mein

ये माना तुम हो ज़माने के बा-कमालों में

یہ مانا تم ہو زمانے کے با کمالوں میں

शायर: Sabiha Sumbul5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये माना तुम हो ज़माने के बा-कमालों में
तो हम भी ख़ुद को समझते हैं बे-मिसालों में

वफ़ा का नाम नहीं शहर के ग़ज़ालों में
मिलेगा ज़हर यहाँ मद-भरे पियालों में

महक उठा है मिरी आरज़ू का शीश-महल
ये कौन आ के बसा है मिरे ख़यालों में

हमारे पास था हर बात का जवाब मगर
उलझ के रह गए हम आप के सवालों में

हम उन के हँसने का अंदाज़ क्या कहें 'सुम्बुल'
कि जैसे दूर बजें घंटियाँ शिवालों में