उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hasin taj ki surat ye be-sada patthar

हसीन ताज की सूरत ये बे-सदा पत्थर

حسین تاج کی صورت یہ بے صدا پتھر

शायर: Sabiha Sumbul6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हसीन ताज की सूरत ये बे-सदा पत्थर
दिखा रहे हैं मोहब्बत का मो'जिज़ा पत्थर

सुबूत-ए-संग-दिली इस से बढ़ के क्या होगा
जो फूल फेंका मिरी सम्त बन गया पत्थर

तुम्हारे शहर को मैं क्यूँ न कामरूप कहूँ
कि इक निगाह ने मुझ को बना दिया पत्थर

समझ सके न कभी मस्लहत ज़माने की
बस इस क़ुसूर पे खाए हैं बारहा पत्थर

करेंगे अब न गिला तुम से बेवफ़ाई का
लो आज हम ने कलेजे पे रख लिया पत्थर

सुना रहे हैं कहानी वफ़ा-परस्तों की
सजे हुए हैं जो मक़्तल में जा-ब-जा पत्थर