उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye KHwab jo ham-safar hain mere

ये ख़्वाब जो हम-सफ़र हैं मेरे

یہ خواب جو ہم سفر ہیں میرے

शायर: Qaisarul Jafri7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये ख़्वाब जो हम-सफ़र हैं मेरे
क़ातिल हैं कि चारागर हैं मेरे

वो सामने आसमाँ है लेकिन
भीगे हुए बाल-ओ-पर हैं मेरे

मैं शम्अ कहाँ कहाँ जलाऊँ
बस्ती के तमाम घर हैं मेरे

मेरे लिए कितनी देर रोएँ
ये लोग जो चारागर हैं मेरे

ये शाम कहाँ से आ रही है
महके हुए बाम-ओ-दर हैं मेरे

फैला तो गिरूँगा आसमाँ पर
पाँव ऐसी ज़मीन पर हैं मेरे

दरिया ने बहुत दिया है 'क़ैसर'
कश्ती न सही भँवर हैं मेरे