उर्दू शायरी · ग़ज़ल

apni tanhai ki palkon ko bhigo lun pahle

अपनी तन्हाई की पलकों को भिगो लूँ पहले

اپنی تنہائی کی پلکوں کو بھگو لوں پہلے

शायर: Qaisarul Jafri5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अपनी तन्हाई की पलकों को भिगो लूँ पहले
फिर ग़ज़ल तुझ पे लिखूँ बैठ के रो लूँ पहले

ख़्वाब के साथ कहीं खो न गई हो आँखें
जब उठूँ सो के तो चेहरे को टटोलूँ पहले

मेरे ख़्वाबों को है मौसम पे भरोसा कितना
बा'द में फूल खिलें हार पिरो लूँ पहले

देखना है वो ख़फ़ा रहता है मुझ से कब तक
मैं ने सोचा है कि इस बार न बोलूँ पहले

दोस्तों ने मुझे वो दाग़ दिए हैं 'क़ैसर'
वो भी आ जाएँ तो दरवाज़ा न खोलूँ पहले