उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye jo surat pe teri gham sa hai Thahra maham

ये जो सूरत पे तिरी ग़म सा है ठहरा 'माहम'

یہ جو صورت پہ تری غم سا ہے ٹھہرا ماہمؔ

शायर: Maham Khan4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये जो सूरत पे तिरी ग़म सा है ठहरा 'माहम'
ऐसा होता है भला चाँद का चेहरा 'माहम'

हम तो समझे थे सहर अब तो हुई जाती है
रात का रंग मगर अब भी है गहरा 'माहम'

लोग रातों में भी फिरते हैं जो बे-ख़ौफ़ी से
तेरे ही सर पे तो जाता है ये सेहरा 'माहम'

कभी तारीकियों में ये भी है सोचा तुम ने
कब तलक देगा युँही रात का पहरा 'माहम'