उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hamein tujhse nahin ai zindagi karna gila koi

हमें तुझ से नहीं ऐ ज़िंदगी करना गिला कोई

ہمیں تجھ سے نہیں اے زندگی کرنا گلہ کوئی

शायर: Maham Khan4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हमें तुझ से नहीं ऐ ज़िंदगी करना गिला कोई
नहीं देना था तू ने गर जो करते भी सिला कोई

तवक़्क़ो' अब के इंसानों से रखना भी है नादानी
कि पत्थर से किसी को है कभी गौहर मिला कोई

हमेशा ना-तवाँ मज़लूम का ही दिल है क्यों टूटा
कभी तो ज़ालिम-ओ-जाबिर का भी दे दिल हिला कोई

वहाँ भी रोग हैं है बे-रुख़ी बे-ए'तिनाई है
यहाँ शिद्दत से मर्ग-ए-हिज्र में है मुब्तला कोई