उर्दू शायरी · ग़ज़ल

nazar tum par paDe to muskurana bhul jate hain

नज़र तुम पर पड़े तो मुस्कुराना भूल जाते हैं

نظر تم پر پڑے تو مسکرانا بھول جاتے ہیں

शायर: Maham Khan7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

नज़र तुम पर पड़े तो मुस्कुराना भूल जाते हैं
हम अपनी दास्तान-ए-ग़म सुनाना भूल जाते हैं

हमेशा सोचते हैं हम उसे खोना नहीं मुश्किल
हम अपनी क़ुव्वत-ए-दिल आज़माना भूल जाते हैं

जहाँ साक़ी का लम्हे भर को भी दीदार हो जाए
जुनून-ए-तिश्नगी का वो ज़माना भूल जाते हैं

ये ज़ंजीरें ये पाबंदी नहीं कुछ फ़ाएदा देतीं
परिंदे क़ैद हों तो चहचहाना भूल जाते हैं

उभरते चाँद का मंज़र या जल्वे हों बहारों के
तिरे आगे सब अपना क़हर ढाना भूल जाते हैं

ग़म-ए-बर्बादी-ए-गुलशन से गुल भी इस क़दर सहमे
दुखी चेहरे पे इक मुस्काँ सजाना भूल जाते हैं

बुलंदी से गिराने के लिए कोशाँ हैं जो 'माहम'
फ़लक तेरा अज़ल से आशियाना भूल जाते हैं