उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye jo lagta hai zarurat se bhi kam bolte hain

ये जो लगता है ज़रूरत से भी कम बोलते हैं

یہ جو لگتا ہے ضرورت سے بھی کم بولتے ہیں

शायर: Ehsanul Haq Mazhar5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये जो लगता है ज़रूरत से भी कम बोलते हैं
हम को वो शख़्स बुलाता है तो हम बोलते हैं

कौन हस्ती का गुज़र मेरे ख़राबे से हुआ
किस तफ़ाख़ुर से यहाँ नक़्श-ए-क़दम बोलते हैं

दोनों जानिब वो अना थी कि ये नौबत आई
अब हमें यार बुलाते हैं न हम बोलते हैं

ये जो हर बात पे कर देते हैं तक़रीर शुरूअ'
हम तो सुनते थे कभी उन के क़लम बोलते हैं

ऐसी बस्ती की ज़बाँ ख़ाक मैं समझूँगा जहाँ
लोग ख़ामोश हैं दीनार-ओ-दिरम बोलते हैं