उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye jo kuchh aaj hai kal to nahin hai

ये जो कुछ आज है कल तो नहीं है

یہ جو کچھ آج ہے کل تو نہیں ہے

शायर: Taj Bhopali5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये जो कुछ आज है कल तो नहीं है
ये शाम-ए-ग़म मुसलसल तो नहीं है

मैं अक्सर रास्तों पर सोचता हूँ
ये बस्ती कोई जंगल तो नहीं है

यक़ीनन तुम में कोई बात होगी
ये दुनिया यूँही पागल तो नहीं है

मैं लम्हा लम्हा मरता जा रहा हूँ
मिरा घर मेरा मक़्तल तो नहीं है

किसी पर छा गया बरसा किसी पर
वो इक आवारा बादल तो नहीं है