उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ghar mein tere paigham ko tarsen

घर में तिरे पैग़ाम को तरसें

گھر میں ترے پیغام کو ترسیں

शायर: Taj Bhopali6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

घर में तिरे पैग़ाम को तरसें
बाहर जल्वा-ए-बाम को तरसें

तुम सूरज और चाँद से खेलो
हम कि चराग़-ए-शाम को तरसें

तुम कि शिकस्त-ए-जाम के आदी
हम कि शिकस्ता जाम को तरसें

और अभी कुछ रात है बाक़ी
और अभी आराम को तरसें

आज हज़ारों काम हैं बाक़ी
फिर भी हज़ारों काम को तरसें

आज़ादी के ऊँचे सूरज
गलियाँ तेरे नाम को तरसें