उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aaj dil soch raha hai jaise

आज दिल सोच रहा है जैसे

آج دل سوچ رہا ہے جیسے

शायर: Taj Bhopali5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आज दिल सोच रहा है जैसे
मय हर इक ग़म की दवा है जैसे

जाँ हथेली पे लिए फिरते हैं
इक यही शर्त-ए-वफ़ा है जैसे

कहीं मोती कहीं तारे कहीं फूल
दहर तेरी ही क़बा है जैसे

दश्त-ए-ग़ुर्बत में तिरा नामा-ए-शौक़
हाथ में फूल खिला है जैसे

इस तरह चुप हैं तिरा ग़म ले कर
ये भी क़िस्मत का लिखा है जैसे