उर्दू शायरी · ग़ज़ल

har dard se bandhe hue rishta koi guzre

हर दर्द से बाँधे हुए रिश्ता कोई गुज़रे

ہر درد سے باندھے ہوئے رشتہ کوئی گزرے

शायर: Taj Bhopali4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हर दर्द से बाँधे हुए रिश्ता कोई गुज़रे
क़ातिल कोई गुज़रे न मसीहा कोई गुज़रे

आईना ब-हर-राह-गुज़र बन गईं आँखें
इक उम्र से बैठे हैं कि तुम सा कोई गुज़रे

वो तिश्नगी-ए-जाँ है कि सहरा को तरस आए
अब होंटों को छूता हुआ दरिया कोई गुज़रे

उन से भी इलाज-ए-ग़म पिन्हाँ नहीं होगा
कह दें जो अगर उन का शनासा कोई गुज़रे