उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dard tha hashr bhi hazar uThe

दर्द था हश्र भी हज़ार उठे

درد تھا حشر بھی ہزار اٹھے

शायर: Taj Bhopali4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दर्द था हश्र भी हज़ार उठे
सच न बोलें तो रस्म-ए-दार उठे

ऐ ग़म-ए-इश्क़ तुझ से हार गए
जान दे कर भी शर्मसार उठे

जाने किस दर्द के तअल्लुक़ से
रात दुश्मन को हम पुकार उठे

अब तो उस ज़ुल्फ़ की घटा छा जाए
दिल से कब तक यूँही ग़ुबार उठे