उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye jis ki yaad ka dil bhi guman kiye hue hai

ये जिस की याद का दिल भी गुमाँ किए हुए है

یہ جس کی یاد کا دل بھی گماں کیے ہوئے ہے

शायर: Ehsan Khan Masood7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये जिस की याद का दिल भी गुमाँ किए हुए है
मिरे यक़ीं को वही बे-निशाँ किए हुए है

था एक रंग जो दुनिया की आँख से ओझल
तिरी नज़र ही उसे ख़ुश-बयाँ किए हुए है

वो एक ज़ख़्म जो दिल पे नहीं लगा लेकिन
वो एक 'उम्र से दिल को मकाँ किए हुए है

उठा जो सर तो खुला राज़-ए-क़ामत-ए-जानाँ
ख़याल किस को सर-ए-आसमाँ किए हुए है

'अजब नहीं कि शब-ए-हिज्र रौशनी से भरे
ख़याल-ए-यार मुझे कहकशाँ किए हुए है

न कोई बात न वा'दा न वस्ल की सूरत
ये किस उमीद को दिल साएबाँ किए हुए है

खुला जो राज़ तो 'एहसान' मुझ पे ये भी खुला
तिरा निशान मुझे बे-निशाँ किए हुए है