उर्दू शायरी · ग़ज़ल

fuzul karte ho jina muhaal shair ka

फ़ुज़ूल करते हो जीना मुहाल शा'इर का

فضول کرتے ہو جینا محال شاعر کا

शायर: Ehsan Khan Masood10 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

फ़ुज़ूल करते हो जीना मुहाल शा'इर का
वो जी रहा है यही है कमाल शा'इर का

झिजक रहा है वो पहलू में इस तरह आते
कि जैसे सहमा हुआ इक ख़याल शा'इर का

सँभालता है वो जिस तरह आग लफ़्ज़ों की
सँभाल तुम नहीं सकते वबाल शा'इर का

ये तितलियों के परों से तराशना मिसरे'
लहू को रंग बनाना कमाल शा'इर का

किसे ख़बर है तिरे काग़ज़ी गुलिस्ताँ को
जला के राख न कर दे जलाल शा'इर का

ये आँसुओं की अमानत है लफ़्ज़ का पर्दा
इसी से बनता है सारा मलाल शा'इर का

ज़रा सा सब्र करो मैं उठा के लाता हूँ
तुम्हारे रू-ब-रू चेहरा निढाल शा'इर का

उदासियों में वो ख़ुशियों की आँच रखता है
उसी तपिश से सँवरता है हाल शा'इर का

वो अपने दर्द को लिखता है इक दवा की तरह
तू अपनी मर्ज़ी से मिसरा' उछाल शा'इर का

ज़रा सा हुस्न-ए-नज़र से तो देख लो 'एहसान'
तुम्हारे ख़्वाब बुनेगा कमाल शा'इर का