उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tere nashe ka lahu mein KHumar baqi hai

तिरे नशे का लहू में ख़ुमार बाक़ी है

ترے نشے کا لہو میں خمار باقی ہے

शायर: Ehsan Khan Masood6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तिरे नशे का लहू में ख़ुमार बाक़ी है
ख़िज़ाँ-रसीदा शजर पर बहार बाक़ी है

गुज़रने वाले गुज़र कर चले गए कब के
बस अब तो याद की इक रह-गुज़ार बाक़ी है

वो एक पल कि मयस्सर हुए थे तुम जिस में
हिसाब-ए-'उम्र में उस का शुमार बाक़ी है

किसी की आँख में ठहरा हुआ कोई आँसू
किसी के ज़ब्त का बन कर वक़ार बाक़ी है

मैं दफ़्न कर न सका जिस को अपने सीने में
उस एक याद का दिल में मज़ार बाक़ी है

सुकूत-ए-दहर में ये किस का शोर है 'एहसान'
ये किस सदा की अभी तक पुकार बाक़ी है