उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye chiKHen ye aah-o-buka kis liye hai

ये चीख़ें ये आह-ओ-बुका किस लिए है

یہ چیخیں یہ آہ و بکا کس لیے ہے

शायर: Tabassum Anwar13 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये चीख़ें ये आह-ओ-बुका किस लिए है
मिरे शहर की ये फ़ज़ा किस लिए है

बता ज़िंदा-दरगोर है आदमी क्यों
बता आसमाँ पर ख़ुदा किस लिए है

हैं मसले हुए शाख़ दर शाख़ गुल क्यों
चमन दर चमन सानेहा किस लिए है

अकेला दिया रहगुज़र का बुझा कर
पशेमाँ बहुत अब हवा किस लिए है

जो तुम सामने आए तो मैं ने जाना
कि मंज़र ने बदली क़बा किस लिए है

न तज़ईन-ए-गुल है न पैग़ाम-ए-ख़ुशबू
गुलिस्ताँ में चलती सबा किस लिए है

मुझे ज़िंदगी में दिया था जहन्नुम
तो अब रोज़-ए-महशर सज़ा किस लिए है

ये तय है यहाँ कोई दर कब खुलेगा
ऐ दरवेश देता दुआ किस लिए है

मिरे चारागर तू ने वा'दा किया था
तो फिर दिल का घाव भरा किस लिए है

ब-नाम-ए-सज़ा जब मिला है ये जीवन
तो जीने में इतना मज़ा किस लिए है

किसी की भी जब मुंतज़िर मैं नहीं हूँ
तो दर मेरा आख़िर खुला किस लिए है

दुआओं में मेरी असर आ गया क्या
वो यूँ जाते जाते रुका किस लिए है

'तबस्सुम' हो कैसे ये उक़्दा-कुशाई
बक़ा किस की ख़ातिर फ़ना किस लिए है