उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mudam le ke mujhe halqa-war nachti hai

मुदाम ले के मुझे हल्क़ा-वार नाचती है

مدام لے کے مجھے حلقہ وار ناچتی ہے

शायर: Tabassum Anwar7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मुदाम ले के मुझे हल्क़ा-वार नाचती है
जिधर चलूँ निगह-ए-तरह-दार नाचती है

मिला है वा'दा-ए-फ़र्दा बजाए नक़्द-ए-विसाल
हमारी रूह को देखो उधार नाचती है

ये किस नज़र ने तिलिस्म-ए-ख़िज़ाँ को काट दिया
पलक झपकते में हर सू बहार नाचती है

फिरे मलूल वो दरगाह के अहाते में
और आए वज्द में तो बे-शुमार नाचती है

पटख़ के सर कभी रोता है हिज्र का आज़ार
उमीद-ए-वस्ल कभी बार बार नाचती है

वही नहीं उसे दरकार इज़्न-ए-ख़ाकी था
जो मिल गया तो ये मुश्त-ए-ग़ुबार नाचती है

हमारी रूह 'तबस्सुम' सुख़न की है जोगन
ग़ज़ल के गर कहीं छिड़ जाएँ तार नाचती है