उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye bhi kya kam hai ki is bazm se hushiyar chale

ये भी क्या कम है कि इस बज़्म से हुशियार चले

یہ بھی کیا کم ہے کہ اس بزم سے ہشیار چلے

शायर: Kailash Mahir4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये भी क्या कम है कि इस बज़्म से हुशियार चले
पारसा आए थे हम बन के गुनहगार चले

देखिए कौन है शोरीदा-सरों का हम-गाम
ज़ुल्फ़-ए-शब-रंग चले साया-ए-दीवार चले

अपनी आशुफ़्ता-सरी अब तो मता-ए-जाँ है
नक़द-ए-दिल नक़्द-ए-सुकूँ तेरे लिए हार चले

इश्क़ में इस से हसीं दाद-ए-जुनूँ क्या 'माहिर'
ज़िंदगी तेरी तमन्ना में तुझे हार चले