उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye be-KHayali ka manzar dikhai deta hai

ये बे-ख़याली का मंज़र दिखाई देता है

یہ بے خیالی کا منظر دکھائی دیتا ہے

शायर: Gaazi Moin6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये बे-ख़याली का मंज़र दिखाई देता है
के बोलता नहीं कुछ पर सुनाई देता है

वो तीरगी है न कुछ भी दिखाई देता है
बस एक माँ का ही चेहरा दिखाई देता है

ये शहर-ए-ख़्वाब में रेज़ा हुए सभी सपने
न वापसी का वो रस्ता दिखाई देता है

ये शब तो कहने को तारीक है बहुत लेकिन
उमीद का इक उजाला दिखाई देता है

निकल पड़े हैं तो क्या प्यास और कैसी धूप
बस अपने गाँव का मंज़र दिखाई देता है

वफ़ा उसूल मोहब्बत सुकून ए'तिबार
ग़लत हर एक का म'आनी दिखाई देता है