उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sari duniya mein hai kis tarah ka manzar yara

सारी दुनिया में है किस तरह का मंज़र यारा

ساری دنیا میں ہے کس طرح کا منظر یارا

शायर: Gaazi Moin5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सारी दुनिया में है किस तरह का मंज़र यारा
अपने ही घर में है हर आदमी डर कर यारा

एक बेचैनी सी है क़ल्ब के अंदर यारा
मेरी तन्हाई है अब बज़्म से बढ़ कर यारा

प्यार कब रहता है बंदिश में ठहर कर यारा
बढ़ता ही जाता है ये हद से गुज़र कर यारा

उस की आँखों की ख़ुमारी की क़सम है हम को
डूबे इक बार जो निकले न उभर कर यारा

धड़कन पे मेरी इक तेरा ही लिखा है नाम
देख लेना तू कभी दिल में उतर कर यारा