उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye aur baat ki lahja udas rakhte hain

ये और बात कि लहजा उदास रखते हैं

یہ اور بات کہ لہجہ اداس رکھتے ہیں

शायर: Hafeez Banarasi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये और बात कि लहजा उदास रखते हैं
ख़िज़ाँ के गीत भी अपनी मिठास रखते हैं

कहें तो क्या कहें हम उन की सादा-लौही को
जो क़ातिलों से तरह्हुम की आस रखते हैं

किसी के सामने फैलाईं किस लिए दामन
तुम्हारे दर्द की दौलत जो पास रखते हैं

उन्हें हयात की तोहमत न दो अबस यारो
जो अपना जिस्म न अपना लिबास रखते हैं

क़रीब-ए-गुल-बदनाँ रह चुके हैं दीवाने
ये ख़ार वो हैं जो फूलों की बास रखते हैं

कहाँ भिगोए कोई अपने ख़ुश्क होंटों को
ये दौर वो है कि दरिया भी प्यास रखते हैं

ख़ुदा का शुक्र अदा कीजे ख़ुश-नसीबी पर
'हफ़ीज़' आप दिल-ए-ग़म-शनास रखते हैं