उर्दू शायरी · ग़ज़ल

asar mein aata gaya main teri saKHawat ke

असर में आता गया मैं तिरी सख़ावत के

اثر میں آتا گیا میں تری سخاوت کے

शायर: Hafeez Banarasi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

असर में आता गया मैं तिरी सख़ावत के
दराज़ होते गए हाथ मेरी हाजत के

लबों पे मौजा-ए-निकहत युँही नहीं रक़्साँ
खिले हैं फूल मिरे दिल में तेरी चाहत के

तपिश कुछ ऐसी थी ख़ुर्शीद-ए-इस्तक़ामत की
पसीने छूट गए शो'ला-ए-'अदावत के

ये बात-बात में तर्क-ए-त'अल्लुक़ात की बात
बताओ क्या यही आदाब हैं मोहब्बत के

हमें भी बख़्श सुकूँ आ कभी इधर भी आ
कि हम भी हैं मुतमन्नी तिरी ज़ियारत के

नवाज़िशें तिरी हाइल अगर नहीं होतीं
तो हम भी करते नज़ारे सुकून-ओ-राहत के

दमक रहे हैं जो दामन पे बन के ला'ल-ओ-गुहर
'हबीब' अश्क हैं दर-अस्ल वो नदामत के