उर्दू शायरी · ग़ज़ल

yaqin se bhi gae aur guman se bhi gae

यक़ीन से भी गए और गुमान से भी गए

یقین سے بھی گئے اور گمان سے بھی گئے

शायर: Ghalib Duraib6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

यक़ीन से भी गए और गुमान से भी गए
वफ़ूर-ए-‘इश्क़ में हम तेरे ध्यान से भी गए

चली ये कैसी हवा साहिबान-ए-'इज़्ज़-ओ-वक़ार
ज़रा सी देर लगी अपनी शान से भी गए

किसी तरह से वफ़ा तो निभा दी हम ने मगर
हमें ये दुख है कि हम अपनी जान से भी गए

रहे ज़मीं पे तो बाक़ी परिंदगी न रही
उड़े तो यूँ कि फिर अपनी उड़ान से भी गए

बहुत हक़ीर सही क़द्र अपने फ़न की करें
न ये रहा तो मियाँ शहद-ओ-नान से भी गए

कि साफ़-गोई-ओ-हक़-गोई के जुनूँ में 'दुरैब'
हम ऐसे लोग तो अपनी ज़बान से भी गए