उर्दू शायरी · ग़ज़ल

yaKH-basta bagh mein koi titli hanut thi

यख़-बस्ता बाग़ में कोई तितली हनूत थी

یخ بستہ باغ میں کوئی تتلی حنوط تھی

शायर: Tahir Hanfi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

यख़-बस्ता बाग़ में कोई तितली हनूत थी
फूलों पे मेरे ख़्वाब की मिट्टी हनूत थी

शहज़ादियों के ख़्वाब हवा ने चुरा लिए
ता'बीर में भी नींद की सिसकी हनूत थी

उस के हदफ़ थे बाइ'स-ए-शर्मिंदगी उसे
उस के हर एक तीर में दासी हनूत थी

लफ़्ज़ों को क़ैद कर लिया उस के हिजाब ने
ओझल नज़र से अर्ज़ की देवी हनूत थी

हर कोह एक क़हर की सूरत दिखाई दे
हर संग में ग़रीब की बेटी हनूत थी

टपका है ख़ून शेल्फ़ से 'ताहिर' ज़मीन पर
किस किस किताब में मिरी चिट्ठी हनूत थी