उर्दू शायरी · ग़ज़ल

baat sun ai chashm-e-tar kuchh hosh kar

बात सुन ऐ चश्म-ए-तर कुछ होश कर

بات سن اے چشم تر کچھ ہوش کر

शायर: Tahir Hanfi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बात सुन ऐ चश्म-ए-तर कुछ होश कर
डूब जाएगा ये घर कुछ होश कर

ख़ुद-कुशी ही मसअले का हल है क्या
बाम से वापस उतर कुछ होश कर

दश्त की जानिब चला तो है मगर
सख़्त है ये रहगुज़र कुछ होश कर

अब किया जज़्बात में गर फ़ैसला
रोएगा तू उम्र भर कुछ होश कर

मत पटख़ ज़िंदाँ में दीवारों पे सर
ख़ूँ से हो जाएँगी तर कुछ होश कर

अपनी आज़ादी न दे सय्याद को
काट कर ख़ुद अपने पर कुछ होश कर

जिस को 'ताहिर' तेरी कुछ परवा नहीं
उस की चौखट पर न मर कुछ होश कर