उर्दू शायरी · ग़ज़ल

falak se jo hue dharti ki nazr sada log

फ़लक से जो हुए धरती की नज़्र सादा लोग

فلک سے جو ہوئے دھرتی کی نذر سادہ لوگ

शायर: Tahir Hanfi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

फ़लक से जो हुए धरती की नज़्र सादा लोग
उन्ही के ग़म से हैं वाक़िफ़ ये बे-लिबादा लोग

मैं अपने आप को अब ढूँढ भी नहीं सकता
मिरे जनाज़े में हैं इस क़दर ज़ियादा लोग

उन्ही में मैं भी हूँ शामिल सो तू नहीं मिलता
बना के तोड़ने वाले हैं जो इरादा लोग

कि चीर डाला गया पहले बे-गुनाह मुझे
मिरे वजूद का चुनते हैं अब बुरादा लोग

रफ़ीक़ छोड़ के दिल में जो रक्खें दुश्मन को
कि मेरे जैसे कहाँ होंगे दिल-कुशादा लोग

जला रहा हूँ मैं ख़ुद को कुछ इस लिए 'ताहिर'
करेंगे दीप की इस लौ से इस्तिफ़ादा लोग