उर्दू शायरी · ग़ज़ल

yahin bahanon bahanon mein mare jaenge

यहीं बहानों बहानों में मारे जाएँगे

یہیں بہانوں بہانوں میں مارے جائیں گے

शायर: Zafar Iqbal7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

यहीं बहानों बहानों में मारे जाएँगे
हम अपने अपने मकानों में मारे जाएँगे

यहाँ पे ज़िंदा रहेंगे वही हक़ीक़त में
कभी कभी जो फ़सानों में मारे जाएँगे

जो बाज़ुओं में यहाँ जी रहे थे देर से हम
ख़बर नहीं थी कि रानों में मारे जाएँगे

यहीं पे मारे गए और ये समझते रहे
कि आने वाले ज़मानों में मारे जाएँगे

हमेशा रक्खी है पर्वाज़ इसी लिए नीची
कि हम बुलंद उड़ानों में मारे जाएँगे

नहीं है रास किसी को जदीदियत अपनी
नए भी हैं तो पुरानों में मारे जाएँगे

'ज़फ़र' वो शेर हमें कुछ नहीं कहेगा मगर
ये सारे लोग मचानों में मारे जाएँगे