उर्दू शायरी · ग़ज़ल

yahi to ek shikayat safar mein rahti hai

यही तो एक शिकायत सफ़र में रहती है

یہی تو ایک شکایت سفر میں رہتی ہے

शायर: Aabid Jafri5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

यही तो एक शिकायत सफ़र में रहती है
हवा-ए-गर्द मुसलसल नज़र में रहती है

जज़ा-ए-काविश-ए-ता'मीर ये मिली है हमें
सदा-ए-तेशा सदा साथ घर में रहती है

हुनर किसी में हो क़िस्मत है उस की दर-बदरी
कि आब-ओ-ताब-ए-गुहर कब गुहर में रहती है

समाअतों का पयम्बर ही बन सके तो सुने
वो दास्ताँ जो लब-ए-चश्म-ए-तर में रहती है

हर एक सुब्ह पे मक़्तल का हो रहा है गुमाँ
न जाने कौन सी सुर्ख़ी ख़बर में रहती है