उर्दू शायरी · ग़ज़ल

basaraton ko rah-e-shauq mein ganwa dekha

बसारतों को रह-ए-शौक़ में गँवा देखा

بصارتوں کو رہ شوق میں گنوا دیکھا

शायर: Aabid Jafri4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बसारतों को रह-ए-शौक़ में गँवा देखा
तुझे न देखा मगर हाँ ये हादिसा देखा

वजूद सौंप के सब कुछ बचा लिया हम ने
न आँख में कोई आँसू न सानेहा देखा

किताब-ए-ज़ीस्त भी अपनी नहीं रही कि यहाँ
हर इक वर्क़ पे नया एक हाशिया देखा

ख़िलाफ़-ए-मौज समुंदर-शनास बह निकले
मैं जिस तरफ़ गया तूफ़ान ही उठा देखा