उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dil se mahrumi-e-ehsas miTane ke liye

दिल से महरूमी-ए-एहसास मिटाने के लिए

دل سے محرومیٔ احساس مٹانے کے لیے

शायर: Aabid Jafri6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिल से महरूमी-ए-एहसास मिटाने के लिए
गुल खिले हैं मिरे ज़ख़्मों को दुखाने के लिए

फिर से आवाज़ के दरिया में मिरे नाम की नाव
बादबानों को उठाती है गिराने के लिए

रात ढलती है चलो ढूँड के जुगनू लाएँ
वादा-ए-अंजुम-ओ-महताब निभाने के लिए

कुछ परिंदे मिरे आँगन में उतर आए हैं
बाल-ओ-पर तेज़ हवाओं से बचाने के लिए

सर से सूरज तिरी चाहत का ढला है शायद
मुझ पे हर साया-ए-दीवार गिराने के लिए

अपने जज़्बों को कोई शक्ल न देना 'आबिद'
वर्ना सूरत को भी तरसोगे दिखाने के लिए