उर्दू शायरी · ग़ज़ल

yahan se chaaron taraf raste nikalte hain

यहाँ से चारों तरफ़ रास्ते निकलते हैं

یہاں سے چاروں طرف راستے نکلتے ہیں

शायर: Idris Babar6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

यहाँ से चारों तरफ़ रास्ते निकलते हैं
ठहर ठहर के हम इस ख़्वाब से निकलते हैं

किसी किसी को है तहज़ीब-ए-दश्त-आराई
कई तो ख़ाक उड़ाते हुए निकलते हैं

यहाँ रिवाज है ज़िंदा जला दिए जाएँ
वो लोग जिन के घरों से दिए निकलते हैं

अजीब दश्त है दिल भी जहाँ से जाते हुए
वो ख़ुश हैं जैसे किसी बाग़ से निकलते हैं

ये लोग सो रहे होंगे जभी तो आज तलक
ज़रूफ़-ए-ख़ाक से ख़्वाबों भरे निकलते हैं

सितारे देख के ख़ुश हूँ कि रोज़ मेरी तरह
जो खो गए हैं उन्हें ढूँडने निकलते हैं