उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dariya wo kahan raha hai jo tha

दरिया वो कहाँ रहा है जो था

دریا وہ کہاں رہا ہے جو تھا

शायर: Idris Babar6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दरिया वो कहाँ रहा है जो था
इस शहर का आख़िरी क़िस्सा-गो था

जो ख़ाक सी दिल में उड़ रही है
याँ कोई ग़ज़ाल हो न हो था

अब तो ये हमारा घर नहीं ख़ैर
पहले भी न था ख़याल गो था

साबित नहीं कर सकोगे तुम लोग
क्या मेरा वुजूद था चलो था

दोनों घड़ियों पर हिज्र का वक़्त
होना नहीं चाहिए था जो था

इस ख़्वाब में क्या नहीं दर-अस्ल
बस कह जो दिया है ख़्वाब जो था