उर्दू शायरी · ग़ज़ल

yahan aaghaz aur anjam badle ja rahe hain

यहाँ आग़ाज़ और अंजाम बदले जा रहे हैं

یہاں آغاز اور انجام بدلے جا رہے ہیں

शायर: Gauhar Aziz7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

यहाँ आग़ाज़ और अंजाम बदले जा रहे हैं
कि जैसे मय-कशों में जाम बदले जा रहे हैं

तरक़्क़ी और ख़ुश-हाली के दिन भी और क्या हों
पुरानी बस्तियों के नाम बदले जा रहे हैं

मुहाफ़िज़ राहज़न हो और ज़ालिम पारसा हो
सुना है आदमी के काम बदले जा रहे हैं

नया मज़हब नई पूजा ख़ुदा भी अब नए हों
सनम-ख़ानों के सब असनाम बदले जा रहे हैं

मुताबिक़ अब नहीं शायद हमारी सोच के वो
बुज़ुर्गों के सभी पैग़ाम बदले जा रहे हैं

क़ुबूल-ए-‘आम कर लें आओ अब अपनी ख़ताएँ
सज़ा से ग़ालिबन इन'आम बदले जा रहे हैं

बुराई को भलाई की सनद दे दे के 'गौहर'
ब-नाम-ए-हुर्रियत अय्याम बदले जा रहे हैं