उर्दू शायरी · ग़ज़ल

main aansuon ko ishq mein kab tak lahu karun

मैं आँसुओं को 'इश्क़ में कब तक लहू करूँ

میں آنسوؤں کو عشق میں کب تک لہو کروں

शायर: Gauhar Aziz8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मैं आँसुओं को 'इश्क़ में कब तक लहू करूँ
मौक़ा' मिले तो दामन-ए-दिल को रफ़ू करूँ

क्या बात है कि आएँ त'अल्लुक़ में तल्ख़ियाँ
मैं सोचता हूँ तुम से कभी गुफ़्तुगू करूँ

जब हो गई है ख़िदमत-ए-शाख़-ओ-शजर नसीब
पैदा चमन में कुछ तो नई रंग-ओ-बू करूँ

सच और झूट दोनों तो इक ही तरह के हैं
मैं क्यों न एक रोज़ इन्हें रू-ब-रू करूँ

मेहमाँ तो हो वो माह-जबीं मेरा कोई शाम
मैं एहतिमाम-ए-बादा-ओ-जाम-ओ-सुबू करूँ

तहज़ीब से हमारी जो बाक़ी रहे सदा
गंगा में तुम नहाओ तो मैं भी वुज़ू करूँ

परवरदिगार ये भी दु'आ कर मिरी क़ुबूल
पूरी न हो जो ऐसी कोई आरज़ू करूँ

'गौहर' मिले ज़रा भी अगर बारिशों का साथ
पैदा मिज़ाज-ए-ख़ाक में ज़ौक़-ए-नुमू करूँ