उर्दू शायरी · ग़ज़ल

shamil mere wujud mein hai bud-o-bash mein

शामिल मिरे वुजूद में है बूद-ओ-बाश में

شامل مرے وجود میں ہے بود و باش میں

शायर: Gauhar Aziz8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

शामिल मिरे वुजूद में है बूद-ओ-बाश में
मैं दूर तक न जाऊँगा उस की तलाश में

मग़रूर कोई होगा सनम हुस्न पर मगर
ख़ूबी तो है निगाह में कुछ बुत-तराश में

काटा तो अपने दाँत से इक आदमी ने था
साँपों का ज़हर कैसे मिला मेरी लाश में

हुस्न-ओ-शबाब शान-ए-ख़ुदा-दाद बाँकपन
इक एक कर के लुट गए फ़िक्र-ए-म'आश में

तारीख़ में अभी भी तुम्ही जाँ-निसार हो
तब्दील कैसे हो गए तुम ज़िंदा लाश में

फ़ितरत में हो फ़रेब तो चेहरे से हर कोई
बहरूपिया सा लगता है अपने क़िमाश में

वो चाल क्या चलेगा नई जानते हैं सब
बावन ही पत्ते आज भी होते हैं ताश में

'गौहर' तुम्हारे लफ़्ज़ अटकने लगे हैं क्यों
कुछ बात है ज़रूर गले की ख़राश में