उर्दू शायरी · ग़ज़ल

guzra bahut hai usko giran jaanta hun main

गुज़रा बहुत है उस को गिराँ जानता हूँ मैं

گزرا بہت ہے اس کو گراں جانتا ہوں میں

शायर: Gauhar Aziz6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

गुज़रा बहुत है उस को गिराँ जानता हूँ मैं
पर था उसी के हक़ में बयाँ जानता हूँ मैं

वो नफ़रतों की आग में बे-रहम जल गया
अब है वुजूद उस का धुआँ जानता हूँ मैं

दीवाना है जली हुई राखों के ढेर में
जो ढूँढता है अपना निशाँ जानता हूँ मैं

आँखें थीं उस की शोख़ हया-दार हो गईं
अब हो गया है वो भी जवाँ जानता हूँ हूँ

साक़ी गिरा हुआ हूँ नशे में तो क्या हुआ
मस्जिद से क्यों हुई है अज़ाँ जानता हूँ मैं

'गौहर' हर एक गाम ठहर जाए क्यों न दर
झुकना है मेरे सर को कहाँ जानता हूँ मैं