उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hum ko hasrat na rahi nashsha-e-baada karte

हम को हसरत न रही नश्शा-ए-बादा करते

ہم کو حسرت نہ رہی نشۂ بادہ کرتے

शायर: Gauhar Aziz8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हम को हसरत न रही नश्शा-ए-बादा करते
हाँ मगर जीने का भरपूर इरादा करते

मेरे कश्कोल में ख़ैरात-ए-वफ़ा दी तो मगर
काश तुम दिल को ज़रा और कुशादा करते

ज़िंदगी तोड़ गई लग के हमें फ़िक्र-ए-म'आश
वो न होती तो तुम्हें 'इश्क़ ज़ियादा करते

चूमते लोग निगाहों से हमें भी अक्सर
कुछ हसीं ज़ेब-ए-बदन गरचे लबादा करते

आप के आने न आने की कोई बात नहीं
बात तो ये थी निभा लेते जो वा'दा करते

हम ने रौशन तो किए आप की राहों में सदा
आँख होती तो चराग़ों से इफ़ादा करते

जज़्ब होते न कहीं आब-ए-पशेमाँ हो कर
हम जो सफ़्हात-ए-गुज़िश्ता का इ'आदा करते

कुछ तो शाएक़ की झलक आप में आती 'गौहर'
अपने अंदाज़-ए-तख़ातुब को जो सादा करते