उर्दू शायरी · ग़ज़ल

yas ko tegh-e-mashq se kaTe

यास को तेग़-ए-मश्क़ से काटे

یاس کو تیغ مشق سے کاٹے

शायर: Lucky farooqi Hasrat9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

यास को तेग़-ए-मश्क़ से काटे
कोई इस नाम को लिखे काटे

मेरी आँखों के सामने काटे
जब तिरा अक्स आइने काटे

ज़िंदगी की ज़मीन में हम ने
अश्क बोए थे क़हक़हे काटे

कुछ तो रफ़्तार भी मिरी कम थी
कुछ दुआओं ने हादसे काटे

मेरी आवाज़ की रसाई ने
ख़ामुशी के मुग़ालते काटे

सारे चालान हुस्न वालों ने
इश्क़ के बैरियर तले काटे

मेरे बूढे बदन पे तंज़ न कर
जब जवाँ था बड़े मज़े काटे

कोई नक़्क़ाद है यहाँ वर्ना
कट गए कैसे हर्फ़ बे-काटे

हम ने काग़ज़ के खेत में 'हसरत'
फ़िक्र बोई थी क़ाफ़िए काटे