उर्दू शायरी · ग़ज़ल

yar ko maine mujhe yar ne sone na diya

यार को मैं ने मुझे यार ने सोने न दिया

یار کو میں نے مجھے یار نے سونے نہ دیا

शायर: Haidar Ali Aatish7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

यार को मैं ने मुझे यार ने सोने न दिया
रात भर ताले-ए-बे-दार ने सोने न दिया

ख़ाक पर संग-ए-दर-ए-यार ने सोने न दिया
धूप में साया-ए-दीवार ने सोने न दिया

शाम से वस्ल की शब आँख न झपकी ता-सुब्ह
शादी-ए-दौलत-ए-दीदार ने सोने न दिया

एक शब बुलबुल-ए-बेताब के जागे न नसीब
पहलु-ए-गुल में कभी ख़ार ने सोने ना दिया

रात भर की दिल-ए-बेताब ने बातें मुझ से
रंज-ओ-मेहनत के गिरफ़्तार ने सोने न दिया

सच है ग़म-ख़्वारी-ए-बीमार अज़ाब-ए-जाँ है
ता-दम-ए-मर्ग दिल-ए-ज़ार ने सोने न दिया

तकिया तक पहलू में उस गुल ने न रक्खा 'आतिश'
ग़ैर को साथ कभी यार ने सोने न दिया