उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aashiq hun main nafrat hai mere rang ko ru se

आशिक़ हूँ मैं नफ़रत है मिरे रंग को रू से

عاشق ہوں میں نفرت ہے مرے رنگ کو رو سے

शायर: Haidar Ali Aatish5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आशिक़ हूँ मैं नफ़रत है मिरे रंग को रू से
पैवंद नहीं चाक गरेबाँ को रफ़ू से

दामन मिरे क़ातिल का न रंगीं हो लहू से
हर-चंद कि नज़दीक हो रग-हा-ए-गुलू से

गुलज़ार-ए-जहाँ पर न पड़ी आँख हमारी
कोताह थी उम्र अपनी हबाब-ए-लब-ए-जू से

करता है वो सफ़्फ़ाक ख़त-ए-शौक़ के पुर्ज़े
मेहंदी मली जाती है कबूतर के लहू से

आशिक़ हूँ मगर करते हैं माशूक़ ख़ुशामद
नाज़ुक है तबीअत मिरी बीमार की ख़ू से