उर्दू शायरी · ग़ज़ल

yar jab tak KHafa nahin hota

यार जब तक ख़फ़ा नहीं होता

یار جب تک خفا نہیں ہوتا

शायर: Yash Trivedi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

यार जब तक ख़फ़ा नहीं होता
प्यार का हक़ अदा नहीं होता

मैं तो सब उस पे छोड़ देता हूँ
मुझ से जब फ़ैसला नहीं होता

मसनदों पे जो बैठ जाते हैं
उन का कोई ख़ुदा नहीं होता

साथ फोटो खिंचा तो लेते हैं
साथ कोई खड़ा नहीं होता

काश उस वक़्त चुप रहे होते
काश वो सब कहा नहीं होता

हम अकेले में बात करते हैं
जब कोई दूसरा नहीं होता

पहले हर आदमी से वाक़िफ़ थे
अब तो अपना पता नहीं होता